Guru Purnima 2009

The teachings and works inspired by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
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Pages: 60
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गुरु पूर्णिमा महोत्सव पर सभी साधकों को हार्दिक बधाई।
गुरुपूर्णिमा पर्व गुरु सेवा के लिए प्रेरित करता है। वस्तुत: गुरु पूर्णिमा का तात्पर्य ही है गुरु चरणों में सर्व समर्पण करके भी सन्तुष्ट न होना क्योंकि सद्गुरु ऋण से कोई भी, कभी भी उऋण नहीं हो सकता।
भगवत्कृपा का सबसे पक्का प्रमाण सद्गुरु मिलन ही है। और सद्गुरु भी साधारण नहीं जब भगवान् की कृपा शक्ति ही कृपालु गुरु देव के रूप में मार्ग दर्शन करे तो इससे बड़ी कृपा और क्या हो सकती है। किन्तु कृपा से लाभ लेना तब ही सम्भव है जब हम इस कृपा का बार-बार चिन्तन करें। इस अमूल्य निधि को पाकर भी साधारण भावना या चिन्तन रहा तो महान् कृतघ्नता एवं महान् दुर्भाग्य ही होगा, क्योंकि इससे अधिक हमें क्या पाना शेष है-
भगवान् का मिलन इतना महत्वपूर्ण नहीं होता जितना सद्गुरु का मिलन होता है। यदि हम यह सोचें कि सद्गुरु तो हमें मिला लेकिन उसके मिलने से असीम आनन्द की अनुभूति तो नहीं हुई, इसका एक मात्र कारण है हमने उसके मूल्य को नहीं समझा। सद्गुरु कृपा का पुन: पुन: चिन्तन करके विभोर हो जाना ही गुरुपूर्णिमा महोत्सव मनाने का उद्देश्य है।
जय हो जय हो सद्गुरु सरकार बलिहार बलिहार।
तू तो कृपा रूप साकार बलिहार बलिहार॥

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